कितने सुंदर लगते हैं
ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में
वे बनाते हैं प्लान
निकल पड़ते हैं परिवार संग
मनाली, रोहतांग,
लेह लद्दाख,
कश्मीर, मसूरी,
नैनीताल,
घोड़े पर चलते
नौका विहार,
ट्रैकिंग ,
बर्फ में स्कीइंग करते
ये पर्यटक
उठाते हैं आनंद और लुत्फ
डल झील में वे नहीं उतरते
डल उतरता है उनमें धीरे धीरे ।।
कुछ पर्यटक जो कहीं नहीं उतरते
छोड़ आते हैं तड़पने को
तरसने को
शुद्ध हवाओं को
शुद्ध नदियों को ।
दम तोड़ रहे हैं पहाड़ भी ,
कुंतल से कुंटल चिप्स के पैकेट, कोला की बोतलें
लील जा रही हैं पहाड़ों को
नदियों में सड़ते पसरे प्लास्टिक
आत्मसात नहीं कर पा रही हैं;
जबकि आत्मसात कर लेती हैं वे
हमारे दुखों के सागर को ।
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